गुड़ और कन्फेक्शनरी
गुड़ एक अशोधित प्राकृतिक चीनी है जोकि किसी प्रकार के रसायन का उपयोग किए बिना उत्पादित किया जाता है। भारत में कुल गुड़ उत्पादन का 70% से अधिक उत्पादन किया जाता है। गुड़ को लोकप्रिय रूप से "औषधीय चीनी" के नाम से जाना जाता है और पोषकता के आधार पर यह शहद के साथ तुलनीय है। 3000 वर्षों से इसे आयुर्वेदिक चिकित्सा में मीठे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा में गुड़ को गले और फेफड़ों के संक्रमण और इलाज में फायदेमंद समझा जाता है। शोधित चीनी मुख्य रूप से ग्लूकोज और फ्रुक्टोज होता हैं। वहीं गुड़ में ग्लूकोज और सुक्रोज शामिल है। लेकिन गुड़ में खनिज और विटामिन होता है जोकि शोधित चीनी में नहीं होते। गुड़ के खनिज तत्व में कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, पोटेशियम और लौह और जिंक तथा तांबे की कुछ मात्रा शामिल है। विटामिन में फोलिक एसिड और बी. कॉम्प्लेक्स विटामिन शामिल है। इस प्रकार, यह ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत है उसके अलावा, यह गठिया रोग को रोकता है, पित्त के विकारों को रोकता है, थकान को हटाने में मदद करता है, मांसपेशियों, नसों और रक्त वाहिकाओं को शिथिल करने में, रक्तचाप को बनाए रखने और जल अवरोधन को कम करने में, हीमोग्लोबिन स्तर को बढ़ाने में और अल्परक्तता को रोकने में मदत करता है। बेकरी और कन्फेक्शनरी उत्पादों में पोषक तत्व, विटामिन और प्रोटीन मिलाए जाते है। इन्हें बिस्कुट, ब्रेड, केक, पेस्ट्री, बन्स, रस्क और रोल आदि बेकरी उत्पाद में स्वादिष्ट पदार्थ के तौर पर शामिल किया जाता है।

इन वस्तुओं में दूसरी तरफ चॉकलेट, हार्ड- बायल्ड स्वीट्स, चूइंग गम आदि शामिल हैं। वर्ष 2024 में ब्रेड और बेकरी उत्पाद बाजार में राजस्व 1.37 बिलियन अमरीकी डॉलर होगा। बाजार में सालाना 6.91% (सीएजीआर 2024-2028) बढ़ने की उम्मीद है (स्रोतः स्टेटिस्टा)। वर्ष 2023 में भारतीय बेकरी बाजार का आकार लगभग 11.07 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया। वर्ष 2024 और 2032 के बीच बाजार के 9.5% सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान है, जो 2032 तक लगभग 25.16 बिलियन अमरीकी डॉलर के मूल्य तक पहुंच जाएगा (स्रोतः विशेषज्ञ बाजार अनुसंधान रिपोर्ट)।


ब्रेड बाजार मात्रा के संदर्भ में लगभग 7% प्रतिवर्ष की वृद्धि का अनुमान है, और हाल के वर्षों में बिस्कुट उद्योग में 8-10% वृद्धि हुई है। बिस्कुट श्रेणी में, क्रीम और विशेषता बिस्कुट 20% प्रतिवर्ष की तीव्र दर पर चल रहा है। वर्तमान में, देश में अनुमानतः 2 मिलियन बेकरी कार्यरत है। कन्फेक्शनरी उद्योग शुगर-बायल्ड कन्फेक्शनरी, चॉकलेट, मिंट और चूइंग गम में विभाजित किया गया है। शुगर-बायल्ड कन्फेक्शनरी में हाई- बायल्ड कैंडी, टॉफ़ी आदि शामिल है तथा यह सबसे बड़ा हिस्सा है। कन्फेक्शनरी उद्योग की वर्तमान क्षमता 85,000 टन है और इसकी वृद्धि दर 10-15% प्रतिवर्ष है।


वर्ष 2024 में ब्रेड सेगमेंट में राजस्व 0.50 बिलियन अमरीकी डॉलर होने के अनुमान है। बाजार में सालाना 6.37% (सीएजीआर 2024-2028) बढ़ने की उम्मीद है। वर्ष 2024 में भारत का ब्रेड बाज़ार 58.36 बिलियन अमरीकी डॉलर होने का अनुमान है और इसके सालाना 8.13% (वर्ष 2024-2028) बढ़ने की उम्मीद है। भारत बिस्कुट बाजार 12.4% की सीएजीआर से बढ़ रहा है और ब्लू वेव कंसल्टिंग के अनुसार, वर्ष 2027 तक बाजार 11,792.3 मिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।


इस उप-शीर्ष के तहत वैयक्तिक उत्पाद इस प्रकार से हैंः

ईख (गन्ना) गुड़
पाल्मायरा गुड़
कच्चा ईख (गन्ना) गुड़
शुगर कन्फेक्शनरी
चॉकलेट
चूइंग गम

भारत तथ्य एवं आंकड़े :
प्रमुख उत्पादक के तौर पर देश को विश्व में गुड़ का एक मुख्य व्यापारी और निर्यातक माना जाता है। वर्ष 2023-24 के दौरान भारत से विश्व को 3,570.77 करोड़ रुपए / 430.88 मिलियन अमरीकी डॉलर की कीमत के 516,746.10 मीट्रिक टन गुड़ और कन्फेक्शनरी उत्पाद का निर्यात किया है।


प्रमुख निर्यात गंतव्य (2023-24): इंडोनेशिया, अमेरिका, केन्या, संयुक्त अरब अमीरात और नेपाल।