भारतीय श्री अन्न (मिलेट्स)

Cereal

श्री अन्न (मिलेट्स) एक उपशीर्षक है जिसमें ज्वार (Sorghum) , पर्ल बाजरा (Pearl Millet), रागी (Finger Millet), सांवा/बार्नयार्ड (Barnyard Millet), चीना/प्रोसो (Proso Millet), कोडो (Kodo Millet), कुट्टू का आटा (Buckwheat), चौलाई (आमरन्तुस्) और कंगनी/फॉक्सटेल (आमरन्तुस्) शामिल हैं। लाखों भारतीयों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का उत्कृष्ट स्रोत होने के कारण, इन्हें 'पौष्टिक अनाज' भी कहा जाता है। भारतीय श्री अन्न (मिलेट्स) पोषण के मामले में गेहूँ और चावल से बेहतर है क्योंकि ये प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं। ये ग्लूटेन-मुक्त भी होते हैं और इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो इन्हें सीलिएक रोग या मधुमेह रोग वाले लोगों के लिए आदर्श बनाता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा श्री अन्न (मिलेट्स) उत्पादक है, जिसकी दुनिया के उत्पादन में 38.40% हिस्सेदारी है। (स्रोतः खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) (01-12-2023 तक अद्यतन))

Countrywise Millet Production Millet Production India

 

श्री अन्न (मिलेट्स) श्रेणी के अंतर्गत उत्पाद निम्नानुसार हैंः

क्र. सं. एचएस कोड उत्पाद
1 10071000 बीज गुणवत्ता का अनाज ज्वार
2 10079000 बीज के अलावा अनाज ज्वार
3 10081010 बीज गुणवत्ता का कुट्टू का आटा
4 10081090 बीज के अलावा कुट्टू का आटा
5 10082110 बीज गुणवत्ता का श्री अन्न (मिलेट्स) (ज्वार)
6 10082120 बीज गुणवत्ता का श्री अन्न (मिलेट्स) (बाजरा)
7 10082130 बीज गुणवत्ता का श्री अन्न (मिलेट्स) (रागी)
8 10082140 सांवा/बार्नयार्ड (Echinochloa esculenta (L.))
9 10082150 चीना/प्रोसो (Panicum miliaceum (L.))
10 10082160 कंगनी/फॉक्सटेल (Setaria italica (L.))
11 10082170 कोडो (Paspalum scrobiculatum (L.))
12 10082180 कुटकी (Panicum sumatrense (L.))
13 10082191 अमरनाथ (Amaranthus (L.))
14 10082199 अन्य 
15 10082910 बीज के अलावा श्री अन्न (मिलेट्स) (ज्वार)
16 10082920 बीज के अलावा श्री अन्न (मिलेट्स) (बाजरा)
17 10082930 बीज के अलावा श्री अन्न (मिलेट्स) (रागी)
18 10082940 सांवा/बार्नयार्ड (Echinochloa esculenta (L.)) 
19 10082950 चीना/प्रोसो (Panicum miliaceum (L.))
20 10082960 कंगनी/फॉक्सटेल (Setaria italica (L.))
21 10082970 कोडो (Paspalum scrobiculatum (L.)) 
22 10082980 कुटकी (Panicum sumatrense (L.)) 
23 10082991 अमरनाथ (Amaranthus (L.)) 
24 10082999 अन्य
25 10083010 बीज गुणवत्ता का श्री अन्न (मिलेट्स) (कैनरी)
26 10083090 बीज के अलावा श्री अन्न (मिलेट्स) (कैनरी)
27 10086000 ट्रिटिकल
28 10089010 बीज गुणवत्ता का अन्य अनाज
29 10089090  बीज के अलावा अन्य अनाज

 

श्री अन्न (मिलेट्स) के लाभः

  • श्री अन्न (मिलेट्स) पारिस्थितिक परिस्थितियों की एक व्यापक श्रृंखला के लिए अत्यधिक अनुकूल है तथा यह फसल वर्षा-सिंचित क्षेत्र में अच्छी तरह से पनपता है; इस फसल को शुष्क जलवायु और पानी, उर्वरकों और कीटनाशकों की न्यूनतम आवश्यकता होती है।
  • स्वास्थ्यवर्धक पौष्टिकता से भरपूर फसलः अन्य अनाजों की तुलना में इसमें बेहतर सूक्ष्म पोषक तत्व एवं बायोएक्टिव फ्लेवोनोइड पाए जाते हैं।
  • श्री अन्न (मिलेट्स) में निम्न ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) होता है तथा यह मधुमेह की रोकथाम से भी जुड़ा होता है।
  • यह आयरन, जिंक तथा कैल्शियम जैसे खनिजों का उपयुक्त स्रोत है।
  • श्री अन्न (मिलेट्स) ग्लूटेन-मुक्त होता है और सीलिएक रोग के रोगियों द्वारा इसका सेवन भी किया जा सकता है।
  • श्री अन्न (मिलेट्स) का हाइपरलिपिडिमिया के प्रबंधन और रोकथाम और सीवीडी के जोखिम पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है।
  • श्री अन्न (मिलेट्स) वजन घटाने, बीएमआई और उच्च रक्तचाप में सहायक पाया गया है।
  • भारत में, श्री अन्न (मिलेट्स) का सेवन आम तौर पर फलियों के साथ किया जाता है, जो प्रोटीन का परस्पर पूरक बनाता है तथा अमीनो एसिड सामग्री को बढ़ाता है, एवं प्रोटीन की समग्र पाचनशक्ति में सुधार करता है।
  • पकाने के लिए तैयार, खाने के लिए तैयार श्रेणी में श्री अन्न (मिलेट्स) आधारित मूल्य वर्धित उत्पाद शहरी आबादी को आसानी से सुलभ और सुविधाजनक रूप से प्राप्त है।
  • श्री अन्न (मिलेट्स) का उपयोग खाद्य पदार्थ के साथ-साथ पशु-चारे के रूप में दोहरे प्रयोजन के लिए भी किया जाता है, जो इसकी खेती को अधिक कुशल बनाता है।
  • श्री अन्न (मिलेट्स) की खेती कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में सहायता प्रदान करती है।

श्री अन्न (मिलेट्स) उत्पादक राज्यः

भारत में प्रमुख श्री अन्न (मिलेट्स) उत्पादक राज्य राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड हैं। वर्तमान में, ये दस राज्य मिलकर 2023-24 (3ⁿᵈ अग्रिम अनुमान) की अवधि के दौरान भारत में श्री अन्न (मिलेट्स) के उत्पादन में लगभग 99 प्रतिशत का योगदान देंगे।